स्कूल भोजन एवं पोषण कार्यक्रम योजना क्या है?
यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसके तहत सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त में पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित हो सके।
इस योजना की शुरुआत कब हुई थी?
इस योजना की शुरुआत वर्ष 1995 में “राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन योजना” के रूप में की गई थी।
अब इस योजना का नया नाम क्या है?
अब इस योजना को “प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (PM POSHAN)” के नाम से जाना जाता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना, विद्यालय उपस्थिति बढ़ाना और सामाजिक समानता को प्रोत्साहित करना है।
किन बच्चों को इस योजना का लाभ मिलता है?
कक्षा 1 से 8 तक के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी बच्चों को इसका लाभ मिलता है।
भोजन में क्या-क्या दिया जाता है?
भोजन में सामान्यतः चावल, दाल, सब्जी, रोटी, और कई बार अंडा या दूध भी दिया जाता है, जिससे आवश्यक कैलोरी और प्रोटीन की पूर्ति हो सके।
योजना के तहत बच्चों को कितनी कैलोरी दी जाती है?
प्राथमिक कक्षा (1-5) के बच्चों को लगभग 450 कैलोरी और उच्च प्राथमिक (6-8) के बच्चों को लगभग 700 कैलोरी वाला भोजन दिया जाता है।
भोजन बनाने की जिम्मेदारी किसकी होती है?
भोजन की व्यवस्था राज्य सरकारों द्वारा की जाती है, और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों या स्कूलों के किचन द्वारा भोजन तैयार किया जाता है।
इस योजना से क्या लाभ हुआ है?
इससे स्कूल उपस्थिति बढ़ी है, कुपोषण में कमी आई है, महिलाओं को रोजगार मिला है, और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिला है।
क्या इस योजना में पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary) बच्चे भी शामिल हैं?
हाँ, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना में अब पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे भी शामिल किए गए हैं।
योजना की निगरानी कैसे की जाती है?
स्कूल प्रबंधन समितियाँ (SMCs) और जिला शिक्षा अधिकारी नियमित रूप से भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की जांच करते हैं।
क्या निजी स्कूलों को भी इस योजना का लाभ मिलता है?
नहीं, यह योजना केवल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए लागू है।





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