पोषण एवं कुपोषण उन्मूलन योजना
स्वस्थ भारत की दिशा में एक सशक्त पहल

भारत जैसे विकासशील देश में जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अब भी पोषण असंतुलन और कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब वर्गों, महिलाओं और बच्चों में यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। कुपोषण न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि देश की उत्पादकता और सामाजिक विकास को भी सीमित करता है। इसी समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने “पोषण एवं कुपोषण उन्मूलन योजना” जैसे कई कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जिनका उद्देश्य हर नागरिक को संतुलित आहार, जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
🌾 कुपोषण की समस्या का स्वरूप
कुपोषण तब होता है जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, खनिज और ऊर्जा पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती। यह दो प्रकार का होता है .
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अल्पपोषण (Undernutrition) – भोजन में कमी या पोषक तत्वों की कमी से होने वाला कुपोषण।
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अतिपोषण (Overnutrition) – अधिक मात्रा में अस्वास्थ्यकर भोजन लेने से मोटापा या अन्य बीमारियों का होना।
भारत में बच्चों में अल्पपोषण की दर लंबे समय तक चिंता का विषय रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 35% बच्चे कम वजन के पाए गए हैं।
🧒 सरकारी प्रयास और प्रमुख योजनाएँ
सरकार ने कुपोषण उन्मूलन के लिए कई बहु-आयामी योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें मुख्यतः निम्नलिखित शामिल हैं .

1. राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan)
साल 2018 में शुरू किया गया यह अभियान “संपूर्ण पोषण, सुपोषित भारत” के लक्ष्य के साथ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य 2025 तक देश से कुपोषण को समाप्त करना है। इस योजना के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को पोषण सेवाएँ दी जाती हैं।
2. आंगनवाड़ी सेवाएँ (ICDS)
एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के अंतर्गत बच्चों को पूरक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और प्री-स्कूल शिक्षा दी जाती है। यह ग्रामीण स्तर पर पोषण सुधार की सबसे प्रभावी प्रणाली है।
3. मिड-डे मील योजना
यह योजना विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है ताकि वे स्कूल में नियमित रहें और कुपोषण से बचें। इससे बच्चों की शारीरिक वृद्धि के साथ-साथ शैक्षणिक प्रदर्शन भी सुधरता है।
4. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली यह योजना पोषण एवं स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
🥦 समग्र दृष्टिकोण: जागरूकता और शिक्षा
कुपोषण से लड़ने के लिए केवल योजनाएँ ही नहीं, बल्कि लोगों की जागरूकता भी बेहद ज़रूरी है। पोषण शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सही आहार, स्तनपान के लाभ और स्वच्छता के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। स्कूलों और समुदायों में “पोषण माह” जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
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🏥 चुनौतियाँ
हालाँकि योजनाएँ व्यापक हैं, परंतु कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं .
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ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पोषण सेवाओं की पहुँच में कमी।
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गरीबी और खाद्य असुरक्षा।
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सामाजिक मान्यताओं और जागरूकता की कमी।
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स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सीमित संख्या।
🌱 भविष्य की दिशा

सरकार अब तकनीकी साधनों जैसे POSHAN Tracker App और डिजिटल डाटा मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से योजनाओं की निगरानी कर रही है। आने वाले वर्षों में “स्थानीय आहार आधारित पोषण सुधार” और “महिलाओं की भागीदारी” पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
🌞 निष्कर्ष
“पोषण एवं कुपोषण उन्मूलन योजना” न केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम है बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की नींव है। एक स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज का निर्माण कर सकता है। जब प्रत्येक बच्चा, महिला और परिवार पोषण से संपन्न होगा, तभी भारत “सशक्त और स्वस्थ राष्ट्र” बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा।
पोषण एवं कुपोषण उन्मूलन योजना क्या है?
यह योजना भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और गर्भवती माताओं में कुपोषण को समाप्त कर स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना है।
इस योजना की शुरुआत कब हुई थी?
पोषण उन्मूलन की दिशा में सबसे बड़ा कदम 2018 में “राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan)” के रूप में उठाया गया था।
इस योजना के मुख्य लाभार्थी कौन हैं?
0 से 6 वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और किशोरियाँ इसके प्रमुख लाभार्थी हैं।
कुपोषण क्या होता है?
जब शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, और खनिज नहीं मिलते, तब व्यक्ति कुपोषण का शिकार होता है।
भारत में कुपोषण की स्थिति कैसी है?
NFHS-5 रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 35% बच्चे पाँच वर्ष से कम उम्र के कम वजन के हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कुपोषण दर में कमी लाना, स्वस्थ आहार की पहुँच बढ़ाना और पोषण शिक्षा के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
“राष्ट्रीय पोषण मिशन” किन योजनाओं से जुड़ा है?
यह ICDS, मिड-डे मील योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं से जुड़ा है।
ICDS योजना क्या है?
एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच और शिक्षा दी जाती है।
क्या स्कूलों में भी पोषण सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं?
हाँ, मिड-डे मील योजना के माध्यम से स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जाता है ताकि वे स्वस्थ रहें और पढ़ाई में रुचि लें।
महिलाओं के लिए विशेष पोषण योजनाएँ कौन-सी हैं?
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आंगनवाड़ी पोषण सेवाएँ, और अनमोल (Anmol App) जैसी योजनाएँ विशेष रूप से महिलाओं के लिए हैं।
क्या इस योजना के अंतर्गत डिजिटल साधनों का प्रयोग किया जा रहा है?
हाँ, POSHAN Tracker App के माध्यम से लाभार्थियों का डेटा और प्रगति की निगरानी की जाती है।
योजना की सफलता के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
सरकार द्वारा नियमित पोषण माह, जनजागरूकता अभियान, और समुदाय आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है।




